भारतीय संविधान में नागरिकता
(Citizenship in the Indian Constitution)
CONSTITUTIONAL LAW — PART 03
LLB Semester Notes | हिंदी माध्यम | परीक्षा उपयोगी अध्ययन सामग्री
ये नोट्स LLB एवं सामान्य संवैधानिक कानून अध्ययन के लिए तैयार किए गए हैं। परीक्षा में उत्तर लिखते समय अपने विश्वविद्यालय के नवीनतम पाठ्यक्रम तथा लागू कानून के आधिकारिक पाठ को प्राथमिकता दें।
1. नागरिकता का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning of Citizenship)
नागरिकता (Citizenship) किसी व्यक्ति और राज्य के बीच स्थापित वह कानूनी संबंध है, जिसके आधार पर व्यक्ति उस राज्य का नागरिक माना जाता है और उसे कानून के अनुसार कुछ अधिकार तथा दायित्व प्राप्त होते हैं। नागरिकता किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Definition in English
सरल भाषा में समझें
जब किसी व्यक्ति को कानून के अनुसार भारत का नागरिक माना जाता है, तब वह भारतीय नागरिक कहलाता है। नागरिकता से जुड़े अधिकार, पात्रता और प्रतिबंध संविधान तथा संबंधित कानूनों के अनुसार निर्धारित होते हैं।
2. संविधान का भाग II: अनुच्छेद 5 से 11
भारतीय संविधान का भाग II प्रारंभ में नागरिकता से संबंधित प्रावधान करता है। ये अनुच्छेद मुख्य रूप से संविधान लागू होने के समय नागरिकता की स्थिति और नागरिकता संबंधी कानून बनाने की संसद की शक्ति को स्पष्ट करते हैं।
| अनुच्छेद | विषय | मुख्य बात |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 5 | संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता | भारत में अधिवास तथा जन्म, माता-पिता के जन्म या निर्धारित निवास जैसी शर्तों से संबंधित। |
| अनुच्छेद 6 | पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता | विभाजन के संदर्भ में भारत आए कुछ व्यक्तियों के लिए विशेष शर्तें। |
| अनुच्छेद 7 | भारत से पाकिस्तान गए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता | 1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान चले गए कुछ व्यक्तियों की स्थिति; निर्धारित अपवाद लागू हो सकते हैं। |
| अनुच्छेद 8 | भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति | विदेश में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के व्यक्तियों के पंजीकरण से संबंधित। |
| अनुच्छेद 9 | स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता प्राप्त करना | स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर अनुच्छेद 5, 6 या 8 के आधार पर नागरिकता का दावा करने का प्रतिबंध। |
| अनुच्छेद 10 | नागरिकता के अधिकारों का जारी रहना | नागरिकता का जारी रहना संसद द्वारा बनाए गए कानून के अधीन है। |
| अनुच्छेद 11 | संसद की कानून बनाने की शक्ति | संसद नागरिकता के अर्जन, समाप्ति और अन्य संबंधित विषयों पर कानून बना सकती है। |
3. अनुच्छेद 5 — संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
अनुच्छेद 5 यह निर्धारित करता है कि संविधान के प्रारंभ पर कौन-से व्यक्ति भारत के नागरिक माने जाएंगे। इसके लिए भारत में अधिवास (Domicile) आवश्यक था और साथ ही नीचे दी गई शर्तों में से कोई एक पूरी होनी चाहिए थी।
- व्यक्ति का जन्म भारत के राज्यक्षेत्र में हुआ हो; या
- उसके माता-पिता में से किसी एक का जन्म भारत के राज्यक्षेत्र में हुआ हो; या
- वह संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले कम-से-कम पाँच वर्ष तक भारत के राज्यक्षेत्र में सामान्य रूप से निवासी रहा हो।
महत्वपूर्ण: ये प्रावधान संविधान के प्रारंभ के समय नागरिकता तय करने के लिए थे। आज जन्म के आधार पर नागरिकता का प्रश्न मुख्य रूप से Citizenship Act, 1955 की लागू शर्तों के अनुसार देखा जाता है।
4. अनुच्छेद 6, 7 और 8 — विभाजन तथा विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति
अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत आए व्यक्ति
यह अनुच्छेद भारत-विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित है। इसमें आने की तारीख, माता-पिता या दादा-दादी के जन्म तथा कुछ मामलों में पंजीकरण और निवास जैसी शर्तों का महत्व था।
अनुच्छेद 7: भारत से पाकिस्तान गए व्यक्ति
यह अनुच्छेद उन व्यक्तियों की स्थिति से संबंधित है जो 1 मार्च 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे। इसमें निर्धारित अपवाद भी है: पाकिस्तान से भारत लौटने वाले कुछ व्यक्तियों के लिए पुनर्वास या स्थायी वापसी के परमिट के आधार पर विशेष प्रावधान लागू हो सकते थे।
अनुच्छेद 8: भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति
यह अनुच्छेद भारत के बाहर रहने वाले ऐसे भारतीय मूल के व्यक्तियों से संबंधित था जो निर्धारित शर्तें पूरी करते थे और भारत के राजनयिक या कौंसलीय प्रतिनिधि के समक्ष पंजीकरण करा सकते थे।
5. अनुच्छेद 9, 10 और 11 का महत्व
अनुच्छेद 9: विदेशी नागरिकता
यदि किसी व्यक्ति ने स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर ली, तो वह अनुच्छेद 5, 6 या 8 के आधार पर भारतीय नागरिकता का दावा नहीं कर सकता। भारत की नागरिकता और विदेशी नागरिकता से संबंधित स्थिति लागू कानून के अनुसार तय की जाती है।
अनुच्छेद 10: नागरिकता का जारी रहना
अनुच्छेद 10 के अनुसार, संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत नागरिक माने जाने वाले व्यक्तियों की नागरिकता संसद द्वारा बनाए गए कानून के अधीन जारी रहती है। इसका अर्थ है कि नागरिकता से जुड़े प्रश्न केवल संवैधानिक अनुच्छेदों तक सीमित नहीं हैं।
अनुच्छेद 11: संसद की शक्ति
अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता के अर्जन, समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य विषयों पर कानून बनाने की शक्ति देता है। इसी संवैधानिक शक्ति के आधार पर संसद ने Citizenship Act, 1955 बनाया।
5 — प्रारंभ पर नागरिकता
6 — पाकिस्तान से भारत आए व्यक्ति
7 — भारत से पाकिस्तान गए व्यक्ति
8 — विदेश में भारतीय मूल के व्यक्ति
9 — विदेशी नागरिकता
10 — नागरिकता का जारी रहना
11 — संसद की कानून बनाने की शक्ति
6. नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act, 1955)
नागरिकता अधिनियम, 1955 भारतीय नागरिकता प्राप्त करने, समाप्त होने और उससे संबंधित अन्य मामलों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इसमें समय-समय पर संशोधन किए गए हैं।
नागरिकता प्राप्त करने के प्रमुख तरीके
| तरीका | अंग्रेजी नाम | अर्थ |
|---|---|---|
| जन्म से | By Birth | भारत में जन्म और लागू कानून की शर्तों के आधार पर। |
| वंश से | By Descent | भारत के बाहर जन्म होने पर माता-पिता की नागरिकता और अन्य लागू शर्तों के आधार पर। |
| पंजीकरण से | By Registration | अधिनियम की धारा 5 में दी गई पात्रता और शर्तों के आधार पर। |
| देशीयकरण से | By Naturalisation | अधिनियम की धारा 6 तथा तीसरी अनुसूची की शर्तें पूरी करने पर। |
| राज्यक्षेत्र के भारत में सम्मिलित होने से | By Incorporation of Territory | जब कोई क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है, तब केंद्र सरकार अधिनियम की धारा 7 के अनुसार संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता निर्धारित कर सकती है। |
जन्म से नागरिकता: तारीख के अनुसार मुख्य नियम
| जन्म की अवधि | सामान्य कानूनी स्थिति |
|---|---|
| 26 जनवरी 1950 से 30 जून 1987 तक | सामान्यतः भारत में जन्म पर्याप्त था, कानून में दिए गए अपवादों के अधीन। |
| 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 तक | भारत में जन्म के साथ माता-पिता में से कम-से-कम एक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक था, लागू अपवादों के अधीन। |
| 3 दिसंबर 2004 को या उसके बाद | भारत में जन्म के साथ माता-पिता दोनों का भारतीय नागरिक होना, या एक का भारतीय नागरिक और दूसरे का अवैध प्रवासी न होना जैसी वैधानिक शर्तें लागू होती हैं। |
नोट: यह तालिका सामान्य अध्ययन के लिए है। विशेष परिस्थितियों, वैधानिक अपवादों और संबंधित समय पर लागू संशोधनों के लिए अधिनियम का आधिकारिक पाठ देखें।
7. भारतीय नागरिकता समाप्त होने के तरीके
Citizenship Act, 1955 में नागरिकता समाप्त होने के तीन प्रमुख तरीके दिए गए हैं:
(क) त्याग (Renunciation) — धारा 8
कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कोई भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता त्यागने की घोषणा कर सकता है। इसकी कानूनी प्रभावशीलता अधिनियम की शर्तों पर निर्भर करती है। नाबालिग बच्चों पर इसके प्रभाव के लिए भी अधिनियम के विशेष प्रावधान हैं।
(ख) समाप्ति (Termination) — धारा 9
यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो धारा 9 के अंतर्गत भारतीय नागरिकता की समाप्ति का प्रश्न उत्पन्न होता है। इसका निर्धारण लागू कानून और संबंधित तथ्यों के अनुसार होता है।
(ग) वंचित किया जाना (Deprivation) — धारा 10
कुछ निर्धारित परिस्थितियों में केंद्र सरकार किसी ऐसे व्यक्ति को भारतीय नागरिकता से वंचित कर सकती है जिसने पंजीकरण या देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त की हो। यह शक्ति कानून में दी गई शर्तों और प्रक्रिया के अधीन है।
8. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA)
Citizenship (Amendment) Act, 2019 ने Citizenship Act, 1955 में संशोधन किया। इसमें निर्धारित समुदायों और देशों से संबंधित कुछ व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान जोड़े गए।
- यह संशोधन अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से संबंधित निर्धारित श्रेणी के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान करता है।
- इसमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों का उल्लेख है।
- निर्धारित शर्तों में 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश की तारीख शामिल है।
- अधिनियम में धारा 6B के माध्यम से पात्र व्यक्तियों के पंजीकरण या देशीयकरण के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।
- कानून में कुछ अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों और Inner Line व्यवस्था वाले क्षेत्रों के लिए अपवाद दिए गए हैं।
नागरिकता संशोधन नियम, 2024 को 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किया गया। पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अपवादों की पूरी जानकारी के लिए मूल अधिनियम तथा आधिकारिक नियम पढ़ना आवश्यक है।
9. भारत में एकल नागरिकता (Single Citizenship)
भारत में सामान्यतः एकल नागरिकता (Single Citizenship) की व्यवस्था है। इसका अर्थ है कि भारत में राज्यों की अलग-अलग राज्य-नागरिकता नहीं होती; व्यक्ति भारतीय नागरिक होता है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय एकता और समान राष्ट्रीय पहचान के विचार से जुड़ी है।
| एकल नागरिकता | द्वैध नागरिकता की अवधारणा |
|---|---|
| भारत में नागरिकता राष्ट्रीय स्तर पर होती है। | कुछ संघीय देशों में संघ और राज्य, दोनों स्तरों की नागरिकता की अवधारणा हो सकती है। |
| उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र की अलग संवैधानिक नागरिकता नहीं होती। | व्यवस्था संबंधित देश के संविधान और कानून पर निर्भर करती है। |
| राज्य में निवास या अन्य पात्रता शर्तें कुछ अधिकारों या सुविधाओं के लिए प्रासंगिक हो सकती हैं, लेकिन वे अलग राज्य-नागरिकता नहीं बनातीं। | अधिकार और कानूनी स्थिति प्रत्येक देश की व्यवस्था के अनुसार बदलती है। |
10. नागरिकता से संबंधित प्रमुख न्यायिक निर्णय
1. Izhar Ahmad Khan v. Union of India (1962)
यह निर्णय नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 और विदेशी नागरिकता स्वेच्छा से प्राप्त करने के प्रश्न के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है। परीक्षा में इसे विदेशी नागरिकता और भारतीय नागरिकता की समाप्ति के कानूनी संदर्भ में पढ़ें।
2. Sarbananda Sonowal v. Union of India (2005)
यह निर्णय अवैध प्रवासन तथा नागरिकता और विदेशी व्यक्तियों की पहचान से जुड़े कानूनी प्रश्नों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसमें असम में अवैध प्रवासन से संबंधित कानून और संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया गया।
11. नागरिकता और राष्ट्रीयता में अंतर
| आधार | नागरिकता (Citizenship) | राष्ट्रीयता (Nationality) |
|---|---|---|
| अर्थ | राज्य की सदस्यता की कानूनी स्थिति। | कानूनी या अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में किसी राज्य से संबंधित होने की स्थिति; अर्थ संदर्भ के अनुसार बदल सकता है। |
| प्रयोग | संवैधानिक अधिकारों और नागरिक दायित्वों के संदर्भ में महत्वपूर्ण। | अंतरराष्ट्रीय कानून, पहचान और यात्रा दस्तावेजों के संदर्भ में प्रयुक्त हो सकता है। |
| कानूनी स्थिति | भारतीय कानून में नागरिकता के लिए विशिष्ट वैधानिक नियम हैं। | हर संदर्भ में इसका अर्थ नागरिकता के बिल्कुल समान नहीं माना जा सकता। |
12. LLB परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर
प्रश्न: भारतीय संविधान में नागरिकता संबंधी प्रावधानों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: भारतीय संविधान में नागरिकता संबंधी प्रावधान भाग II के अनुच्छेद 5 से 11 तक दिए गए हैं। ये प्रावधान संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता की स्थिति, भारत-विभाजन के कारण उत्पन्न विशेष परिस्थितियों, विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों और संसद की कानून बनाने की शक्ति से संबंधित हैं।
अनुच्छेद 5 संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता निर्धारित करता है। अनुच्छेद 6 पाकिस्तान से भारत आए कुछ व्यक्तियों से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 7 भारत से पाकिस्तान गए कुछ व्यक्तियों की स्थिति स्पष्ट करता है। अनुच्छेद 8 विदेश में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के व्यक्तियों के पंजीकरण से संबंधित है। अनुच्छेद 9 स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता प्राप्त करने के प्रभाव से संबंधित है। अनुच्छेद 10 नागरिकता के अधिकारों के जारी रहने को संसद द्वारा बनाए गए कानून के अधीन रखता है और अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने की शक्ति देता है।
अनुच्छेद 11 के अंतर्गत संसद ने नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया। इस अधिनियम में नागरिकता प्राप्त करने, त्यागने, समाप्त होने और कुछ परिस्थितियों में नागरिकता से वंचित किए जाने के प्रावधान हैं। अधिनियम में समय-समय पर संशोधन भी किए गए हैं।
अतः भारतीय नागरिकता को समझने के लिए संविधान के अनुच्छेद 5 से 11 तथा नागरिकता अधिनियम, 1955 दोनों का अध्ययन आवश्यक है।
13. परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- भारतीय संविधान के भाग II में नागरिकता संबंधी प्रावधानों की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
- अनुच्छेद 5 से 11 तक का विश्लेषण कीजिए।
- नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत नागरिकता प्राप्त करने के प्रमुख तरीकों का वर्णन कीजिए।
- भारतीय नागरिकता समाप्त होने के तीन प्रमुख तरीकों को समझाइए।
- भारत में एकल नागरिकता की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
- नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
14. महत्वपूर्ण MCQs — उत्तर सहित
प्रश्न 1. भारतीय संविधान में नागरिकता संबंधी प्रावधान किस भाग में हैं?
(A) भाग I (B) भाग II (C) भाग III (D) भाग IV
उत्तर: (B) भाग II
प्रश्न 2. नागरिकता से संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद कौन-से हैं?
(A) 1–4 (B) 5–11 (C) 12–35 (D) 36–51
उत्तर: (B) अनुच्छेद 5–11
प्रश्न 3. नागरिकता अधिनियम किस वर्ष बनाया गया?
(A) 1949 (B) 1950 (C) 1955 (D) 1976
उत्तर: (C) 1955
प्रश्न 4. संसद की नागरिकता पर कानून बनाने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?
(A) अनुच्छेद 7 (B) अनुच्छेद 9 (C) अनुच्छेद 10 (D) अनुच्छेद 11
उत्तर: (D) अनुच्छेद 11
प्रश्न 5. पंजीकरण द्वारा नागरिकता का प्रमुख प्रावधान नागरिकता अधिनियम की किस धारा में है?
(A) धारा 5 (B) धारा 6 (C) धारा 8 (D) धारा 10
उत्तर: (A) धारा 5
प्रश्न 6. देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता का प्रमुख प्रावधान किस धारा में है?
(A) धारा 4 (B) धारा 6 (C) धारा 8 (D) धारा 9
उत्तर: (B) धारा 6
प्रश्न 7. नागरिकता त्यागने (Renunciation) से संबंधित धारा कौन-सी है?
(A) धारा 5 (B) धारा 7 (C) धारा 8 (D) धारा 10
उत्तर: (C) धारा 8
प्रश्न 8. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 किस अधिनियम में संशोधन करता है?
(A) भारतीय दंड संहिता (B) नागरिकता अधिनियम, 1955 (C) भारतीय साक्ष्य अधिनियम (D) कंपनी अधिनियम
उत्तर: (B) नागरिकता अधिनियम, 1955
15. Quick Revision — एक नजर में
| विषय | याद रखने योग्य तथ्य |
|---|---|
| संविधान का भाग | भाग II |
| संवैधानिक अनुच्छेद | 5 से 11 |
| मुख्य अधिनियम | Citizenship Act, 1955 |
| नागरिकता के प्रमुख तरीके | जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण और राज्यक्षेत्र का सम्मिलन |
| नागरिकता त्याग | धारा 8 |
| नागरिकता समाप्ति | धारा 9 |
| नागरिकता से वंचित करना | धारा 10 |
| नागरिकता संशोधन अधिनियम | 2019 |
| नागरिकता संशोधन नियम | 2024 |
16. Frequently Asked Questions (FAQ)
उत्तर: संविधान के भाग II में अनुच्छेद 5 से 11 तक।
उत्तर: भारत सामान्यतः एकल नागरिकता की व्यवस्था अपनाता है। OCI कार्ड को पूर्ण दोहरी नागरिकता नहीं माना जाता।
उत्तर: नहीं। जन्म की तारीख और नागरिकता अधिनियम की लागू शर्तों के अनुसार पात्रता तय होती है।
उत्तर: हाँ। संविधान का अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता संबंधी कानून बनाने की शक्ति देता है।
उत्तर: Overseas Citizen of India। यह पूर्ण भारतीय नागरिकता या दोहरी नागरिकता के समान नहीं है।
17. आधिकारिक अध्ययन स्रोत
- विधायी विभाग — केंद्रीय अधिनियम
- विधायी विभाग — अधिनियमों के PDF
- गृह मंत्रालय — नागरिकता अधिनियम एवं नियम
- Citizenship (Amendment) Rules, 2024 — आधिकारिक PDF
कानून और नियमों में संशोधन हो सकते हैं। परीक्षा या कानूनी उपयोग से पहले आधिकारिक नवीनतम पाठ की पुष्टि करें।