छठी सदी ईसा पूर्व : भारतीय इतिहास का परिवर्तनकारी युग
छठी सदी ईसा पूर्व भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। इतिहासकार इसे "धार्मिक क्रांति का युग", "दूसरे नगरीकरण का युग" तथा "बौद्ध-जैन युग" कहते हैं।
छठी सदी ईसा पूर्व में भारत में पहली बार बड़े राज्यों (महाजनपदों) का विकास हुआ तथा बौद्ध एवं जैन धर्म का उदय हुआ।
छठी सदी ईसा पूर्व को समझने के कारण
- महाजनपदों का उदय
- द्वितीय नगरीकरण
- लोहे का व्यापक प्रयोग
- व्यापार एवं उद्योग का विकास
- बौद्ध एवं जैन धर्म का उदय
- मगध का उत्कर्ष
द्वितीय नगरीकरण (Second Urbanization)
सिंधु सभ्यता के पतन के बाद भारत में पुनः नगरों का विकास छठी सदी ईसा पूर्व में हुआ। इसी कारण इसे द्वितीय नगरीकरण कहा जाता है।
✓ लोहे का प्रयोग
✓ कृषि उत्पादन में वृद्धि
✓ व्यापार का विस्तार
✓ अधिशेष उत्पादन
आर्थिक परिवर्तन
| क्षेत्र | परिवर्तन |
|---|---|
| कृषि | लोहे के हल से उत्पादन बढ़ा |
| व्यापार | आंतरिक एवं बाह्य व्यापार विकसित |
| मुद्रा | आहत मुद्राओं का प्रचलन |
| श्रेणियाँ | व्यापारियों एवं शिल्पियों के संगठन |
16 महाजनपद : राजनीतिक क्रांति का युग
छठी सदी ईसा पूर्व में भारत में अनेक छोटे-छोटे जनों और जनपदों का विकास होकर 16 महाजनपदों का निर्माण हुआ। इनका उल्लेख अंगुत्तर निकाय में मिलता है।
16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली राज्य अंततः मगध बना।
16 महाजनपद एवं उनकी राजधानियाँ
| महाजनपद | राजधानी |
|---|---|
| अंग | चंपा |
| मगध | राजगृह |
| काशी | वाराणसी |
| कोशल | श्रावस्ती |
| वत्स | कौशाम्बी |
| अवंति | उज्जयिनी |
| वज्जि | वैशाली |
| मल्ल | कुशीनगर एवं पावा |
| चेदि | शुक्तिमती |
| कुरु | इंद्रप्रस्थ |
| पांचाल | अहिच्छत्र एवं कांपिल्य |
| मत्स्य | विराटनगर |
| शूरसेन | मथुरा |
| अश्मक | पोतन |
| गांधार | तक्षशिला |
| कंबोज | राजपुर |
गणराज्य एवं राजतंत्र
| गणराज्य | राजतंत्र |
|---|---|
| वज्जि, मल्ल, कंबोज | मगध, कोशल, अवंति, वत्स |
✓ वज्जि सबसे शक्तिशाली गणराज्य था।
✓ वैशाली विश्व का पहला गणतांत्रिक नगर माना जाता है।
✓ अश्मक दक्षिण भारत का एकमात्र महाजनपद था।
मगध के उत्कर्ष के कारण
- उपजाऊ गंगा का मैदान
- लोहे की प्रचुरता
- हाथियों की उपलब्धता
- व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण
- शक्तिशाली शासक
बौद्ध धर्म : छठी सदी ईसा पूर्व की धार्मिक क्रांति
छठी सदी ईसा पूर्व में वैदिक कर्मकांडों, पशुबलि तथा सामाजिक असमानता के विरोध में बौद्ध धर्म का उदय हुआ। इसके संस्थापक महात्मा बुद्ध थे।
महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुम्बिनी में हुआ था।
महात्मा बुद्ध का जीवन
| घटना | स्थान |
|---|---|
| जन्म | लुम्बिनी |
| महाभिनिष्क्रमण | कपिलवस्तु |
| ज्ञान प्राप्ति | बोधगया |
| प्रथम उपदेश | सारनाथ |
| महापरिनिर्वाण | कुशीनगर |
चार आर्य सत्य
✓ दुःख का कारण
✓ दुःख निरोध
✓ दुःख निरोध का मार्ग
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अष्टांगिक मार्ग
- सम्यक दृष्टि
- सम्यक संकल्प
- सम्यक वाणी
- सम्यक कर्म
- सम्यक आजीविका
- सम्यक प्रयास
- सम्यक स्मृति
- सम्यक समाधि
बौद्ध संगीति
| संगीति | स्थान | अध्यक्ष |
|---|---|---|
| प्रथम | राजगृह | महाकश्यप |
| द्वितीय | वैशाली | सबाकामी |
| तृतीय | पाटलिपुत्र | मोग्गलिपुत्त तिस्स |
| चतुर्थ | कुंडलवन | वसुमित्र |
✓ बुद्ध ने उपदेश पाली भाषा में दिए।
✓ बौद्ध धर्म ईश्वरवाद में विश्वास नहीं करता।
✓ मध्यम मार्ग बौद्ध धर्म का आधार है।
✓ त्रिपिटक बौद्ध साहित्य का प्रमुख ग्रंथ है।
जैन धर्म, मगध का उत्कर्ष एवं छठी सदी ईसा पूर्व का समग्र विश्लेषण
छठी सदी ईसा पूर्व में बौद्ध धर्म के साथ-साथ जैन धर्म का भी व्यापक विकास हुआ। यह काल भारतीय धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक इतिहास में क्रांतिकारी परिवर्तन का युग माना जाता है।
जैन धर्म का उदय
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव तथा 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।
| घटना | स्थान |
|---|---|
| जन्म | कुंडग्राम (वैशाली) |
| ज्ञान प्राप्ति | जृम्भिकग्राम |
| प्रथम उपदेश | पावापुरी क्षेत्र |
| निर्वाण | पावापुरी |
जैन धर्म के पंच महाव्रत
✓ सत्य
✓ अस्तेय
✓ अपरिग्रह
✓ ब्रह्मचर्य
जैन धर्म के त्रिरत्न
✓ सम्यक ज्ञान
✓ सम्यक चरित्र
मगध का उत्कर्ष
छठी सदी ईसा पूर्व में सभी महाजनपदों में मगध सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा।
| शासक | योगदान |
|---|---|
| बिंबिसार | हर्यक वंश का शक्तिशाली शासक, वैवाहिक संबंधों द्वारा विस्तार |
| अजातशत्रु | वज्जि संघ को पराजित किया, पाटलिग्राम का विकास |
| उदायिन | पाटलिपुत्र को राजधानी बनाया |
✓ उपजाऊ गंगा घाटी
✓ लोहे की उपलब्धता
✓ हाथियों की प्रचुरता
✓ शक्तिशाली शासक
✓ व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण
बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म : तुलनात्मक अध्ययन
| आधार | बौद्ध धर्म | जैन धर्म |
|---|---|---|
| संस्थापक | गौतम बुद्ध | महावीर स्वामी |
| मुख्य सिद्धांत | मध्यम मार्ग | अहिंसा |
| भाषा | पाली | प्राकृत |
| मोक्ष का मार्ग | अष्टांगिक मार्ग | त्रिरत्न |
UPSC / PCS / SSC Quick Revision
✓ सबसे शक्तिशाली महाजनपद – मगध
✓ सबसे शक्तिशाली गणराज्य – वज्जि संघ
✓ वैशाली – प्रथम गणतंत्र
✓ बुद्ध का जन्म – लुम्बिनी
✓ महावीर का जन्म – कुंडग्राम
✓ प्रथम बौद्ध संगीति – राजगृह
✓ चतुर्थ बौद्ध संगीति – कुंडलवन
✓ जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर – महावीर
✓ द्वितीय नगरीकरण – छठी सदी ईसा पूर्व
✓ आहत मुद्राओं का प्रचलन इसी काल में हुआ
निष्कर्ष
छठी सदी ईसा पूर्व भारतीय इतिहास का एक निर्णायक काल था। इसी समय महाजनपदों का उदय, मगध का उत्कर्ष, बौद्ध धर्म और जैन धर्म का विकास, तथा द्वितीय नगरीकरण जैसी महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं। यह काल आगे चलकर मौर्य साम्राज्य, भारतीय दर्शन और प्राचीन भारतीय राज्य व्यवस्था की नींव बना।
UPSC Ancient History Study Series
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